इस ब्लॉग़ में अरावली पर्वत श्रंखला में स्थित Historical Fort,Historical Temple,Prehistorical Place,Natural Place,Historical Dam,Wildlife sanctuary,Ancient Bodhist Place के बारे में जानकारी दी गयी है

बुधवार, दिसंबर 23, 2020

तक्षकेश्वर धाम-भानपुरा (M.P.)# 2

भानपुरा से लगभग 22 किलोमीटर दूर नावली गाँव के पास अरावली की सुरम्यभूमि में स्थित प्राकृतिक छटा से परिपूर्ण यह स्थान तक्षकेश्वर, ताखा ज़ी, ताखेश्वरजी आदि नामों से प्रसिद्ध है!
तक्षकेश्वर धाम-भानपुरा (M.P.)# 2
तक्षकेश्वरनाथ कि दिव्य प्रतिमा 


यहाँ एक प्राकृतिक भव्य जलप्रपात और पवित्र और गहरा जलकुंड है! यह नागो के राजा  तक्षक और आयुर्वेद के जनक  धनवंतरी  का स्थान हैं!  यहाँ 12 वीं शताब्दी में बना हुआ एक पौराणिक व ऐतिहासिक ताखाज़ी का मंदिर है! 

ताखेश्वर धाम
ताखाजी का मार्ग एक बोर्ड दिखता है 


प्रत्येक वर्ष वैशाख महीने की पूर्णिमा को यहाँ मेले का आयोजन होता है! इस स्थान का महत्व पुराणों में भी देखने को मिलता है!


गांधी सागर बांध-भानपुरा (M. P. ) के बारे में जानने के लिये यहाँ click करें !


हिंगलाज गढ़ में लगभग डेढ़ घंटा घूमने के बाद हम एक और महत्वपूर्ण स्थान ताखाजी यानी तक्षकेश्वर धाम के लिए रवाना हुए, जो यहां से 15 किलोमीटर की दूरी पर था! रास्ता में बाइक के साइलेंसर से कभी-कभी फट की आवाज़ आ रही थी जिसको हमने इग्नोर कर दिया था! लगभग आधे घंटे बाद हम इस रमणीय स्थान पर पहुँचे!

तखेश्वर धाम भानपुरा
ताखाजी का कुंड 


     ताका जी के प्रमुख स्थल!


    यहां पानी का स्रोत एक गर्म पानी का झरना है, जो लगभग डेढ़ सौ -दो सौ फुट की ऊंचाई से गिरकर एक खूबसूरत मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करता है! यहा बारहमासी झरना है जो पहाड़ों से निकलकर निरंतर गिरता रहता है! मानसून के दौरान यह झरना आश्चर्यचकित कर देता है!

    तखेश्वर धाम
    ताखाजी का झरना 


    चिब्बड़ नाला-भानपुरा (M.P.)गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में स्थित ऐतिहासिक एवं प्राचिन चिब्बड़ माता के मंदिर तथा पाषाण कालीन शैलचित्र के बारे में जानने के लिये यहाँ click करें !

    पवित्र जल कुंड!

    झरने का पानी गिर कर कर एक विशाल कुंड का निर्माण करता है! स्थानीय लोगों के अनुसार इस जलकुंड की गहराई आज तक पता नहीं चली है! जल कुंड में विभिन्न प्रकार की मछलियों पाई जाती है! यह स्थान गंगा के समान पवित्र होने के कारण लोग यहाँ अस्थि विसर्जन भी करते हैं!

    तखेश्वर धाम
    ताखाजी का पवित्र जल कुंड 

     

    देसी जड़ी बूटियों का भंडार यहाँ है!

    आयुर्वेद के जनक धनवंतरी का स्थान होने से यहाँ प्राकृतिक संसाधन और बेशकीमती दुर्लभ जड़ी बूटियों का भंडार है! कई जानकार लोग यहाँ आते हैं! पहले धनवंतरीजी की पूजा करके फिर बूटियों की खोज कर ले जाते हैं!

    तखेश्वर धाम
    ताखाजी कुंड के पास का दृश्य 

    गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में स्थित प्राचिन एवं ऐतिहासिक चतुर्भूज नाथ मंदिर तथा चतुर्भूज नाला में स्थित विश्व की सबसे लंबी पाषाणकालीन शेलचित्र श्रंखला के बारे में जानने के लिये यहाँ क्लिक करें !


    एक गोमुख झरना भी यहाँ है!

    पहाड़ों का अंदर से निकलकर एक छोटी सी गर्म पानी की जलधारा गाय के मुख के समान पत्थर से निकलकर गिरती है! जिसमें स्नान से कई रोग ठीक हो जाते हैं! माना जाता है कि यह जलधारा कई जड़ी बूटियों से होकर गुजरती है, इसीलिए पवित्र माना जाता है!

    तखेश्वर धाम
    ताखाजी का गर्म पानी का गौमुख झरना 


    तक्षकेश्वर धाम-भानपुरा
    गौमुख झरना ताखाजी 



    प्रागैतिहासिक कालीन यह स्थान है!

    यहाँ ऊपर पहाड़ में बने रॉक शेल्टर में हजारों साल पुरानी शैल चित्र भी पाए गए हैं! जो यह दर्शाता है कि प्रागैतिहासिक काल में यहां कभी आदि मानव का निवास था! लेकिन दिन ढल जाने और ऊंचाई पर गुफा होने के कारण हम वहाँ पहुँच नहीं पाए! यहाँ एक और स्थान हैं ताखाजी महाराज की बॉम्बी जहाँ दीपक लगाए जाते हैं, वह भी हमसे छूट गया! अगली बार देखने का बहाना लेकर हम तुरंत वहाँ से निकले क्योकि मार्ग थोड़ा ख़राब था 


    दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत मालाओं में से एक अरावली पर्वत के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें! 

    नदी का उद्गम स्थल भी यहाँ है!

    पहाड़ों से विशाल झरना कुंड में गिरता है और कुंड से पानी एक नाले के रूप में बहता है जो आगे जाकर एक नदी का रूप धारण कर लेता है! इस नदी का नाम ताखली नदी है जो बहकर राजस्थान की ओर चली जाती है!

    तखेश्वर धाम
    ताखाजी के कुंड से ताखली नदी का उद्गम स्थल 


    तखेश्वर धाम
    ताखाजी के कुंड से ताखली नदी का उद्गम स्थल 


    पुराणों मैं भी जिक्र है यहाँ का!

    पांडवो के वंशज व अर्जुन के पौत्र और अभिमन्यु और उत्तरा के पुत्र राजा परीक्षित जंगल में भटकते हुवे प्यास से व्याकुल होकर ऋषि के आश्रम पहुंचे हैं व पानी मांगते हैं, लेकिन ऋषि ध्यान में तन्मय होने के कारण राजा कि बात सुन नहीं पाते हैं! जिससे परीक्षित क्रोधित होकर पास में मरे हुए सर्प को ऋषि के गले में डाल देते हैं! जब ऋषि पुत्र श्रंगी आकर दृश्य देखते हैं तो क्रोध के वशीभूत होकर परीक्षित को श्राप दे देते हैं कि 7 दिन में तक्षक नाग के काटने से तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी! इस पर राजा परीक्षित 7 दिन के लिए अपने आप को सुरक्षित करने की कोशिश करते हैं!अग्रिम उपचार हेतु वैद्यराज धनवंतरी जी जिनको देखने मात्र से सर्प दंश ठीक होने का वरदान होता है उनको  बुलवा भेजते हैं! जब तक्षक को इस बारे में पता चलता है तो धनवंतरी जी की परीक्षा लेने के लिए यहां आते हैं और एक पेड़ पर अपना विष डालते हैं कुछ देर बाद वह पेड़ सूख जाता है !धनवन्तरि जी उस पेड़ की तरफ देखते हैं और उनके देखने से पेड़ वापस हरा भरा हो जाता है!अब तक्षक को विश्वास हो जाता है कि धनवंतरी जी राजा परीक्षित को बचाने में सफल हो जाएंगे !उनको रोकने के लिए तक्षक धन्वंतरि जी के मार्ग में एक सोने की छड़ी बनकर गिर जाते  है!धनवंतरी जी रास्ते में पड़ी छड़ी को उठा लेते हैं !कुछ दूर चलने पर धनवंतरी जी अपनी पीठ को उस छड़ी से खुजलाते हैं,और उसी समय छड़ी सर्प बन कर  धनवंतरी जी को काट लेती है ! धनवन्तरि जी अपनी पीठ को आंखों से देख नहीं पाने की वजह से उनकी मृत्यु हो जाती है !माना जाता है यह वही स्थान है!बाद में नागराज तक्षक भी यहीं निवास करने लग जाते हैं!

    मालवा के प्रसिद्ध धार्मिक व ऐतिहासिक दूधाखेड़ी माताजी का मंदिर भानपुरा मध्यप्रदेश के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें !


    धार्मिक और ऐतिहासिक मंदिर यहाँ     है!

    दसवीं शताब्दी में बने इस मंदिर में नागों राजा तक्षक की एक प्रतिमा है जिसमें ऊपर से रक्षा करने वाले सात सर्प की आकृति वाली प्रतिमा साथ में उनके पुत्र व पत्नी को दर्शाया गया है और हाथ में एक नरमुंड दिखाया गया है!

    तखेश्वर धाम
    ताखाजी महाराज कि अति प्राचिन प्रतिमा 
    Takshkeshwar pratima
    ताखाजी महाराज कि प्रतिमा नजदीक से 




      नागराज तक्षक की प्रतिमा के सामने आयुर्वेद के जनक वैद्यराज धनवंतरी जी की प्रतिमा स्थापित है!

    तखेश्वर धाम
    आयुर्वेद के जनक धन्वन्तरि ज़ी कि अति प्राचिन प्रतिमा 



    तखेश्वर धाम
    आयुर्वेद के जनक धन्वन्तरि ज़ी कि अति प्राचिन प्रतिमा का नजदीक दृश्य 


    मुख्य मंदिर में भगवान शिव शंकर की मूर्ति स्थापित है! जिसे नागो के राजा तक्षक का स्वामी माना जाता है!

    तखेश्वर धाम
    भगवान शंकर का मुख्य मंदिर 


    तखेश्वर धाम
    हनुमान मंदिर ताखाजी 

    तखेश्वर धाम
    दिवार में स्थित गणेश ज़ी कि प्राचिन प्रतिमा ताखाजी 

    तखेश्वर धाम
    भैरव ज़ी कि प्रतिमा 

    तखेश्वर धाम
    ताखाजी कुंड कि सीढिया 

    तखेश्वर धाम
    ताखाजी कुंड का द्वार 

    तखेश्वर धाम
    ताखाजी के स्थान का मनमोहक दृश्य 

    तखेश्वर धाम
    ताखाजी के स्थान का मनमोहक नजारा 

    तखेश्वर धाम
    ताखाजी के स्थान का मनमोहक नजारा

    गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य की जानकारी व घूमने के स्थान के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें !


    यात्रा के दौरान सावधानियाँ!

    • अकेले न जाये किसी जानकर को साथ ले जाए!
    • उचित मात्रा में पानी के साथ रखें और खाने पिने का प्रबन्ध रखें!
    • यदि आप उच्च या निम्न रक्त चाप रोगी हैं तो जाने से बचे!
    • अपने साथ उचित दवाई का प्रबंधन रखें!
    • ये क्षेत्र अभयारण्य का हिस्सा है और यहां कई जंगली जानवरों तेंदुआ, भालू, लकड़बग्गा आदि का निवास है इसीलिए  हमेशा सावधान रहें!

     कब जा सकते हैं!

    वैसे तो इस स्थान पर किसी भी मौसम में जा सकते हैं लेकिन वर्षा ऋतू में रास्ते में कीचड़ हो सकता है! गर्मी के मौसम मे वातावरण शुष्क होने से तेज गर्मी होती है! अक्टूबर महीने से मार्च महीने तक मौसम ठंडा होने से सबसे अनुकूल होता है!


    कैसे जा सकते है!

    भानपुरा मालवा मध्य प्रदेश मंदसौर जिले का हिस्सा है जो राजस्थान झालावाड़ जिले से सटा हुआ है! संबंधित रेलवे स्टेशन भवानी मंडी (दिल्ली मुंबई रेल मार्ग) जो कि 25 किलोमीटर गिरता है और रामगंज मंडी जो कि 40 किलोमीटर पड़ता है! यहाँ से बस मार्ग द्वारा भानपुरा आसानी से दूर जा सकता है! और भानपुरा से व्यक्तिगत वाहन बाइक या कार द्वारा ताखेश्वर ज़ी तक जा सकते हैं!


    तो दोस्तों यह आज की यात्रा थी! हम लगभग 9:00 बजे रात को घर पहुंचे !हमारी सेकंड हैंड बाइक ने हमारा पूरा साथ दिया!

    इस लेख मैं अरावली पर्वत में स्थित मालवा कि पौराणिक और ऐतिहासिक जगह तक्षकेश्वर, ताखाजी, ताखेश्वर के बारे में जानकारी दी है! उम्मीद करता हूँ कि आपको यह लेख पसंद आये! मिलते हैं अगले दिन की यात्रा के लेख में !

     आप अपनी राय कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं!


     ब्लॉग-पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

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    8 टिप्‍पणियां:

    1. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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    2. यह मंदिर साधुओं की तपोभूमि के नाम से जाना जाता है यहां पर बहुत सारे रहस्य छिपे हुए हैं यहां पर लाखों जड़ी बूटियां जिनको जड़ असली के नाम से पुकारा जाता है इसी मंदिर के आसपास स्थित माना जाता है यह मंदिर बहुत ही प्राचीन मंदिर है और इसकी शोभा देखने मात्र से ही बनती है यह नागो के राजा तक्षक और आयुर्वेद के जनक धनवंतरी का स्थान हैं माना जाता है यहाँ 12 वीं शताब्दी में बना हुआ एक पौराणिक व ऐतिहासिक ताखाज़ी के नाम से प्रसिद्ध है यहां पर जो गोमुखी है उसमें सर्दी के समय गर्म पानी और गर्मियों में ठंडा पानी आता है माना जाता है कि इस गौ मुखि में जो पानी आ रहा है वह शिप्रा नदी से आ रहा है यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां पर सीढ़ियां उतर कर मंदिर तक पहुंच जाता है

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